आओ दोस्तों, तुम्हें बताएं,
गाथा कृषि अभियंताओं की|
मिट्टी में भी सोना उगाएं,
सेवा करते किसानों की॥
ज्ञान मिला विश्वविद्यालयों से,
मेहनत से पहचान मिली|
चार वर्षों की कठिन तपस्या,
सपनों को उड़ान मिली॥
दो वर्षों की उच्च शिक्षा से,
प्रौद्योगिकी में निष्णात बने|
शोध-साधना के पथ पर चलकर,
“आचार्य” की उपाधि धरे॥
कृषि यंत्रों की नई तकनीक,
इनकी अपनी शान है|
आधुनिक सिंचाई प्रणाली से,
हर खेत में मुस्कान है॥
मृदा और जल संरक्षण का,
ज्ञान सभी को देते हैं|
सौर ऊर्जा, बायोगैस से,
हरियाली को बढ़ाते हैं॥
खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में,
इनकी अपनी पहचान है|
आर्टीफिशियल इंटलेजन्ससे,
कृषि का बढ़ता मान है॥
देश-विदेश की कंपनियों में,
अपनी प्रतिभा दिखलाते हैं|
सरकारी, अर्धसरकारी सेवा में,
कर्तव्य खूब निभाते हैं॥
बैंक अधिकारी, वैज्ञानिक बन,
देश का गौरव बढ़ाते हैं|
प्रतियोगी परीक्षाएँ जीतकर,
नई सफलता पाते हैं॥
कई युवा उद्यमी बनकर,
रोज़गार नए बनाते हैं|
कृषि अभियंता बन भारत का,
भविष्य उज्ज्वल करते हैं॥
कृषि अभियंता केवल पेशा नहीं,
राष्ट्र निर्माण का आधार है|
आधुनिक खेती, समृद्ध किसान,
यही विकास का सार है॥
बनना है कृषि अभियंता?
बारहवीं के बाद (भौ. रसा. एवं गणित ) उत्तीर्ण करो,
एमएचसीईटी या जेईई अपनाओ|
प्रवेश प्रक्रिया पूरी करके,
अपने सपनों को सच बनाओ॥
महाराष्ट्र के विद्यार्थी,एमसीएईआरका मार्ग चुनो|
कृषि शिक्षा की इस राह पर,
उज्ज्वल अपना भविष्य बुनो॥
आओ बच्चों, आज संकल्प लें,
ज्ञान-विज्ञान का दीप जलाएँ|
कृषि अभियंता बनकर हम,
भारत की खेती आगे बढ़ाएँ॥


डॉ. पुनमचंद सपकाळे ९४०३५६५९२६
प्राचार्य डॉ. उल्हास पाटील कृषी अभियांत्रिकी एवं तंत्रज्ञान महाविद्यालय, जळगाव.









